किसी प्रियजन की मृत्यु का एक ख़याल भी दहला जाती है।पर मुझे मेरी मृत्यु की कल्पना बहुत रोमांचित करती है।कितना सुकून होगा।कितना आराम होगा?न कोई डर होगा,न कोई चिंता।न कोई अपना होगा न पराया।एक अनंत शून्य होगा जिसमें हम आज़ाद होंगे।

Comments

Popular posts from this blog