आज मुझे पता चला कि कैसे कोई वो हो जाता है जो होने से उसे नफरत होती है।परिस्थिति कैसे उसे पूरी तरह बदल देती है।उसकी भाषा, उसका व्यवहार,प्रेम,संवेदना सब खत्म हो जाता है।
इन दिनों जितनी हताशा और निराशा है शायद कभी नहीं थी।ऐसा महसूस हो रहा कि जीवन के हर जंग में हार ही मिली। ऐसा लगता है कि मेरे पास अब किसी को देने के लिए कड़वाहट,खीझ,गुस्सा, नफ़रत और शिकायतों के सिवा कुछ भी नहीं बचा हो।