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Showing posts from November, 2022
किसी प्रियजन की मृत्यु का एक ख़याल भी दहला जाती है।पर मुझे मेरी मृत्यु की कल्पना बहुत रोमांचित करती है।कितना सुकून होगा।कितना आराम होगा?न कोई डर होगा,न कोई चिंता।न कोई अपना होगा न पराया।एक अनंत शून्य होगा जिसमें हम आज़ाद होंगे।

कहना ही क्या

हमसे मत पूछो कैसे मंदिर टूटा सपनों का ग़ैरों का दोष नहीं ये किस्सा है अपनों का